दो नयन हैं जो प्यारे हैं ….

दो नयन हैं, जो प्यारे हैं

कुछ तारे चाँद सितारे हैं

एक नदिया के किनारे हैं

छुट-मुट स्वप्न सँवारे हैं

 

झिलमिल-झिलमिल रातो में

कुछ हल्की-फुलकी बाँतो में

कुछ किस्से कहानी कहने में

कुछ मन के अनुभव बतलाने में

 

सन्नाटे के कोलाहल में

कुछ आधी पूरी यादो में

कुछ उनकी आवाज़ो में

कुछ अपनी सरगम साजो में

 

सब मन ही मन की बातें हैं

हर रोज नहीं पर कभी कभी

कुछ कहने में कुछ चुप रहने में

मजा मिला है बहने में

 

भाव कभी उन्मुक्त हुए

कभी डूब गए चुप रहने में

आवाज कभी दे गये

या दिल ही दिल में गोहराने में

 

जब सहसा बैठे-बैठे

मन यादों से भर आया है

लगा कभी वो यंही कंही

या उन्ने पास बुलाया है

 

दो नयना हैं जो प्यारे हैं …..

कुछ तारे चाँद सितारे हैं

एक नदिया के किनारे हैं

छुट-मुट स्वप्न सँवारे हैं